Wednesday, June 8, 2016

वाहन चोरी हो जाने पर थानेदार को शिकायत पत्र ।

परीक्षा  भवन
क ख ग विद्यालय
च छ ज नगर

दिनांक  - 5 जून 2016

सेवा में
थानाध्यक्ष
उमरा पुलिस  स्टेशन
सुरत - 395007

विषय  - वाहन चोरी  हो  जाने पर थानेदार को शिकायत पत्र ।

महोदय
निवेदन  है कि मै शिवाजी  पार्क का  निवसी हूँ  ।मेरी  स्विफ्ट  कार  , जिसका  रजिस्टेशन नं - जी जे 5 -   2436  है,  मेरे  घर के सामने से  किसी  चुरा लिया  । जिसका एफ आई आर  मैने गत 31 मई को  ही लिखा  दिया है  । गाडी का रंग  सफेद है  और  नीले रंग का  पट्टा  बना हुआ है  । यह लगभग एक  बजे  रात  के बाद  का वाकिया है ।  मै  30 मई की रात साढे  बारह बजे अपने  परिवार के साथ  सिनेमा  देखकर  आने के बाद  अपने घर के सामने  गाडी  खडी कर दिया   था  । गाडी  2014  माॅडल  की है ।
                                       अतः  श्रीमान जी  से निवेदन है कि  उचित  कार्यवाही  करते हुए  चोर का  पता लगाने  का कष्ट करें । पत्र  लिखकर  मैं  उम्मीद करता हूं कि  मेरी  गाडी  का  पता  अवश्य  लग जाएगा  ।

भवदीय
क्ष त्र ज्ञ

Tuesday, June 7, 2016

बिन सत्संग विवेक न होई ।

प्रस्तुत  सूक्ति ' बिन सत्संग  विवेक न होई  'का तात्पर्य यह है कि  कितनी ही  शिक्षा  क्यो न प्राप्त कर ली  जाए  पर  बिना  सत्संग के  ज्ञान  नहीं  प्राप्त  किया जा सकता है । सत्संग का  अर्थ है सज्जनों की  संगति तथा  विवेक  का  अर्थ है  :-   सत्य - असत्य   ;  अच्छे - बुरे  के अंतर का ज्ञान  होना ।यह  ज्ञान  मात्र  सज्जनों  की संगति  से ही प्राप्त  किया जा सकता है । व्यक्ति  जिस प्रकार  की संगति करता है , उसी प्रकार का  गुण  सीखता है । एक वृक्ष पर तोते के दो बच्चे  रहते थे,  एक  बच्चा  एक ऋषि के  आश्रम में रहकर  पला  । वह  आश्रम में  आने वाले  हर व्यक्ति  का अभिवादन  किया  करता था  । इसके  विपरीत  दूसरा  बच्चा  चोरों  की  संगति  में  पला  । वह तोता  चोरों को  उस रास्ते से  आने वाले  राही की  सूचना  देता था, जिससे  चोर यात्रियों को  लूट लिया  करते थे  । यह संगति का ही असर  था कि दोनों  तोतों  का स्वभाव  विपरीत  गुणों  वाला  हो गया  ।

Monday, May 16, 2016

संवाद - सैनिक तथा अफसर के बीच

सैनिक  -श्रीमान जी, मेरी माँ  की  तबियत  खराब है । मुझे  उसके  पास  जाना है  ।इसलिए  मुझे  कुछ दिनों  का  अवकाश  चाहिए  ।
अफसर - इस  समय  अवकाश  नहीं  मिल  सकता  । हमारे  बटालियन में  कई सैनिक  पहले ही  अवकाश पर  है ।
सैनिक  - परन्तु  , सर ! माँ  के प्रति  मेरा  भी कुछ  कर्तव्य है  ।
अफसर - इस  माॅ के के प्रति  तुम्हारा  कर्तव्य  नहीं है  ।
सैनिक - ऐसा  क्यों  कहते हैं  सर , इस  माँ के लिए तो मेरा सिर  भी  हाजिर है  ।
अफसर - ठीक है  , आज  ही अन्य लोगों को  उपस्थित  होने की  सूचना  भेजी  जाएगी  ।किसी के  आते ही  तुम  माँ के पास  चले जाना ।
सैनिक -  यस सर ।धन्यवाद  ।

Saturday, May 14, 2016

विज्ञापनों का आम जनता पर प्रभाव पडता है । इस विषय पर प्रकाश डालते हुए संपादक को पत्र ।

परीक्षा भवन
क ख ग विद्यालय
च छ ज नगर

सेवा में
संपादक , नवभारत टाइम्स
अशोक  नगर
नई दिल्ली  - 110001

महोदय
आप  के प्रसिद्ध  एवं  उत्कृष्ट  समाचार  के  माध्यम से  मै यह बताना  चाहता हूँ कि  आज विज्ञापनों के  दौर में  जनता  इतनी भ्रमित हो  जा रही है  कि वस्तुओं की  गुणवत्ता  पर ध्यान  ही नहीं  दिया जा रहा है  । विज्ञापनों को  इतना  लुभावना  बनाया  जाता है  कि लोग शीघ्र ही  आकर्षित  हो जाते हैं , खासकर  वच्चे  फिर  जिनकी जिद के आगे  बडों  की  एक  न चलती  है  । बच्चे  विज्ञापन  टेलीविजन पर  पर देखते हैं  औऱ  बडों  से जिद करके खरीदवाते हैं  ।  इसप्रकार  खराब गुणवत्ता  वाली  वस्तुएं  बाजार में  धडल्ले  से बिकती हैं । मैं  आप के  समाचार पत्र के  माध्यम से मै  लोगों को  आगाह  कराना  चाहता  हूँ कि वे कोई भी  चीज  खरीदने के  पहले  उसकी  गुणवत्ता  देखें  ।  बाजार में  उससे  उत्तम बस्तु  कम कीमत में  मिलती है  । इस  प्रकार ठगे जाने  से भी  बचा जा सकता है ।
                     अतः  महोदय  से  निवेदन है कि  आप इस  बिषय को अपने  समाचार पत्र में  छापकर  हमें  अनुग्रहीत  करें  ।इससे  देश  के  निर्माण में भी  मदद होगी  ।

सधन्यवाद
भवदीय
क्ष त्र ज्ञ

दिनांक  - 14 मार्च  2016

Friday, May 13, 2016

पारंपरिक भोजन बनाम फास्ट फूड

पारंपरिक भोजन  अर्थात वह भोजन जो पुरानी परंपरा के अनुसार पकाया  व खाया जाता है । पारंपरिक  भोजन  शरीर  की  आवश्यकता  के अनुसार तैयार किया  जाता है  ।यह शरीर  की रोग प्रतिरोधक क्षमता को  बढाता है । इस से शरीर को  संतुलित  खुराक  मिलती है  । मोटापा नहीं  बढता तथा  शरीर  स्वस्थ रहता है  । भोजन  को जरूरत के अनुसार  उचित  ढंग से  उबालकर  ,सेंककर अथवा तलकर पकाया  जाता है । इसके  विपरीत  फास्ट फूड को पकाने  का तरीका  बिल्कुल  अलग  होता है । फास्ट फूड  जरूरत  से अधिक  पकाया  जाता है  ।स्वाद बढाने के लिए  इसमें  अजीनोमोटो जैसी  चीजों का इस्तेमाल किया जाता है  जो  स्वास्थ्य  के  लिए बहुत ही  खतरनाक  होता है । स्वाद से आकृष्ट  युवावर्ग  फास्ट फूड  की  अच्छाई  व बुराई को  समझे  बिना  उपयोग  करते हैं ,जिसका  असर  उनके  मन ,मस्तिष्क  तथा  स्वास्थ्य  पर  पडता  है  । फास्ट फूड का  अधिक उपयोग  करने  वाले  लोग  समय से पहले ही  उच्च  रक्तचाप  ,डायविटीज  जैसी  बीमारियों के  शिकार हो जाते हैं  । इससे  युवा वर्ग  को सावधान रहने की  आवश्यकता है ,  जिससे  लंबा सुखी  व स्वस्थ  जीवन  जी सकें  ।

समरथ को नहिं दोष गोसाईं ।

'समरथ को नहिं दोष गोसाईं ' सूक्ति  से यह तात्पर्य है कि  जो व्यक्ति  ताकतवर है  उसकी  गलतियों को  लोग  नही देखते  या देखकर  भी ध्यान  नहीं  देते क्योंकि  उसका  वे कुछ  कर नहीं सकते हैं । एक  थानेदार  किसी  सामान्य  नागरिक  की गलती पर उसके  साथ  जैसा बर्ताव करता है,  उस तरह का बर्ताव  वह किसी  राजनेता के साथ,  उससे बडी  गलती  पर भी  नहीं  करता  , जबकि  कानून  सबके लिए एक ही  होता है । एक राजा  थे । उनका  एक बेटा  था । बेटा  गुरुकुल में  पढता था  । उसी गुरुकुल में   अन्य  बाबालक  भी पढते थे  । गलती  राजा  का बेटा  करता  ,सजा  दूसरे  वच्चे को मिलती । यही नहीं, बल्कि  अच्छा  कार्य  दूसरे  बच्चे   करते  , पुरस्कार राजा  के  लडके  को मिलता था  ।  एक दिन  सभी  बच्चे  मुख्य  आचार्य  से शिकायत  करने  गए,  मुख्य  आचार्य ने  उन्हें  समझाते हुए कहा,  - बच्चों  देखो ,क्या  तुममें  से पहले  कभी  किसी  शेर की  बलि  चढाते  देखा है  ? जिस तरह   केवल बकरे की  बलि दी जाती है,  उसी तरह  समर्थ लोगों की  गलती नहीं  किसी को भी नहीं  दिखाई देती है । अर्थात  समरथ के  नहि दोष गोसाईं  ।

Monday, April 25, 2016

पिताजी को अपनी परीक्षा की तैयारी के बारे में जानकारी देते हुए पत्र लिखो ।

परीक्षा  भवन
क ख ग विद्यालय
च छ ज नगर 

दिनांक  - 25 अप्रैल  2016

आदरणीय  पिताजी
सादर चरण स्पर्श, के पश्चात विदित हो कि आप का पत्र मिला, पढकर समाचार से अवगत हुआ । आप ने परीक्षा की तैयारी के बारे में पूछा है । मेरी परीक्षा अग्रिम मास की पाॅचवी तारीख से प्रारंभ हो रही है । मै भी अपने  जी  -जान से  परीक्षा  की तैयारी में लग गया  हूँ । सुबह पाँच बजे से सात बजे तक पढाई करने के बाद विद्यालय जाता हूँ । विद्यालय से लौटने के बाद , भोजन  कर के  रूप  पुनः  पढने के लिए  बैठ जाता हूँ ।  इस  बार  मैं  आप  की कसौटी पर खरा उतरने का प्रयास करूँगा । प्रयास ही नहीं, बल्कि  कक्षा में  प्रथम स्थान प्राप्त करने का प्रयास  करूँगा । 
दादा  -दादी एवं मम्मी   को मेरी ओर से प्रणाम कहना । छोटे  भाई को  मेरा  ढेर  सारा प्यार  ।

आप  का प्रिय  पुत्र
क्ष त्र ज्ञ